26 नवंबर: मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक फैसला?
तलाक-ए-हसन पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी सुनवाई, महिलाओं की गरिमा पर सवालनई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ 26 नवंबर को उस विवादित इस्लामी प्रथा तलाक-ए-हसन की समीक्षा करेगी, जो महिलाओं की गरिमा से जुड़े संवैधानिक अधिकारों के लिए चुनौती बन चुकी है। तलाक-ए-हसन में मुस्लिम पति तीन महीने में तीन बार तलाक कहकर शादी खत्म कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही संकेत दिया है कि यह प्रथा संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 के तहत महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। जस्टिस सूर्यकांत ने पिछले सुनवाई में कहा था:"कैसे एक सभ्य समाज में महिलाओं की गरिमा को प्रभावित करने वाली प्रथा को जारी रहने दिया जा सकता है?"
यह मामला पत्रकार बेनजीर हीना की याचिका पर चल रहा है, जिन्होंने तर्क दिया कि तलाक-ए-हसन महिलाओं के अधिक...










