महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव 2025: लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने का समय
लेखक: विनायक अशोक लुनिया
भारत का लोकतंत्र केवल संसद या विधानसभा तक सीमित नहीं है। इसकी असली ताकत और आत्मा उन संस्थाओं में बसती है जो जनता के सबसे नज़दीक हैं — ग्राम पंचायतें, नगर परिषदें और नगर पंचायतें**।हाल ही में **महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित नगर निकाय चुनावों की अधिसूचना इस लोकतांत्रिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है।
आने वाली 2 दिसंबर 2025 को राज्य के लगभग 300 नगरीय निकाय फिर से जनता की अदालत में जाएंगे — विश्वास का नया जनादेश पाने के लिए।
🔹 स्थानीय शासन — लोकतंत्र का असली चेहरा
स्थानीय निकाय चुनावों में लोकतंत्र अपनी सबसे नज़दीकी अभिव्यक्ति पाता है।जहाँ सांसद और विधायक नीतियाँ बनाते हैं, वहीं नगरसेवक और पार्षद उन्हें धरातल पर अमल में लाते हैं**।सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएँ इन्हीं के निर्णयों पर निर्भर करती हैं।
इसलिए,...










